चीनी वैज्ञानिकों का मानना है कि घातक कोरोनावायरस की उत्पत्ति वुहान मछली बाजार से सिर्फ 300 गज की दूरी पर स्थित एक रिसर्च लैब से हुई। हमारे इस लेखमें बताया गया है, कि कैसे कोरोनावायरस वुहान प्रयोगशाला से लीक हुआ।
एक्सक्लूसिव रिपोर्ट: क्या कोरोना वायरस एक जैविक हथियार है
एक्सक्लूसिव इंटरव्यू देखिए: जैवयुद्ध विशेषज्ञ डॉ फ्रांसिस बॉयल – कोरोनावायरस एक जैविक युद्ध हथियार

बीजिंग द्वारा प्रायोजित साउथ चाइना यूनिवर्सिटी ऑफ़ टेक्नोलॉजी के एक नए सनसनीखेज कागज के अनुसार वुहान सेंटर फॉर डिसीज़ कंट्रोल (WHCDC), हुबेई प्रदेश में एक नए रोग-संचार को जन्म दे सकता था।
स्कॉलर Botao Xiao और Lei Xiao का दावा है कि 2019-nCoV कोरोनावायरस की संभावित उत्पत्ति, WHCDC के प्रयोगशालाओं में रोग ग्रस्त जानवरों को रखने से हुई है, जिनमें 605 चमगादड़ शामिल थे।
इसमें यह भी उल्लेख किया गया है कि चमगादड़ों (जो कि कोरोना वायरस से जुड़े हैं) नें एक बार एक शोधकर्ता पर हमला कर दिया था और जिसके बाद ‘चमगादड़ का खून भी उसकी त्वचा पर पाया गया था’।

यह रिपोर्ट कहती है किसभी रोगियों के genome sequence 96% या 89% तक के चमगादड़ के CoV ZC45 कोरोनावायरस के समान थे, जो मूल रूप से Rhinolophusaffinis (intermediate horseshoe bat) में पाया गया था।’
इस रिपोर्ट के अनुसार वुहान सीफूड बाजार से लगभग 600 मील दूर एकमात्र देशी चमगादड़ कैसे पाए गए? और चमगादड़ों की युन्नान और झेजियांग (Yunnan and Zhejiang) प्रदेशों से उड़कर जाने की संभावना बहुत ही कम थी।
इसके अलावा यह सुझाव देने के लिए कोई सबूत नहीं है कि स्थानीय आबादी चमगादड़ खाती है।

इसके बजाय इस रिपोर्ट में WHCDC में कुछ सौ गज की दूरी पर किए जा रहे शोध का भी जिक्र किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, WHCDC के शोधकर्ताओं में से एक ने बताया कि उसने अपनी त्वचा पर एक चमगादड़ का खून मिलने के बाद दो सप्ताह तक खुद को क्वारंटाइन (quarantine) कर लिया था। उसी आदमी नें खुद को तब भी क्वारंटाइन (quarantine) किया था जब एक चमगादड़ ने उसपे पेशाब कर दिया था।
और उन्होंने एक चमगादड़ से live tick की खोज करने का भी उल्लेख किया है – यह परजीवी एक मेजबान जानवर के रक्त के माध्यम से संक्रमण पारित करने की अपनी क्षमता के लिए जाना जाता है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि WHCDC, एक केंद्रीय अस्पताल से भी सटा हुआ था, जहाँ डॉक्टरों का पहला समूह इस महामारी के दौरान संक्रमित हुआ था।
यह बिलकुल मुमकिन है कि वायरस लीक होकर चारों ओर फ़ैल गया और उनमें से कुछ ने इस महामारी में प्रारंभिक रोगियों को दूषित किया, हालांकि भविष्य के अध्ययन के लिए ठोस सबूतों की आवश्यकता है।
रिपोर्ट बताती है कि WHCDC के साथ-साथ वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (virology) भी वायरस को लीक कर सकती थी।

इस प्रयोगशाला ने बताया कि चीनी ‘हॉर्सशू’ चमगादड़ Severe Accurate Respiratory Syndrome कोरोनावायरस (SARS-CoV) के लिए प्राकृतिक जलाशय थे, जो 2002-2003 महामारी का कारण बना था।
सैध्यान्तिक अन्वेषक ने एक ऐसी परियोजना में भाग लिया, जिसने SARS-CoV रिवर्स जेनेटिक्स प्रणाली का उपयोग करके एक वायरस उत्पन्न किया और मानव उद्भव के लिए संभावित सूचना दी। एक प्रत्यक्ष अटकल यह थी कि SARS-CoV या इसका व्युत्पन्न प्रयोगशाला से लीक हुआ है।
रिपोर्ट यह निष्कर्ष निकालती है कि यह जानलेवा कोरोनावायरस शायद वुहान में एक प्रयोगशाला से उत्पन्न हुआ है।
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